डेराबस्सी, अखंड लोक (देव शर्मा )
डेराबस्सी के गांव त्रिवेदी कैंप में रहने वाले एक गरीब बुजुर्ग दंपती के घर में इस समय सन्नाटा पसरा है और आंगन में उदासी छाई हुई है। पिछले तीन महीनों से उनके घर का गुजारा बेहद मुश्किल हो गया है, जब से डीएवी पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल सरीता यादव पर आरोप है कि उन्होंने दबंगई दिखाते हुए उनका चाय का खोखा तुड़वा दिया।
बुजुर्ग दंपती के पास मौके की वीडियो भी मौजूद है, जिसमें स्कूल का स्टाफ और सुरक्षा गार्ड हाथ में कुल्हाड़ी लेकर खोखा तोड़ते और मौके से भागकर स्कूल के अंदर जाते दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद 8 जनवरी को डेराबस्सी पुलिस में शिकायत देने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे न्याय की उम्मीद लगाए बैठे लोगों का कानून पर से भरोसा उठता जा रहा है।
लोग अक्सर कहते हैं कि कानून सिर्फ अमीरों की रक्षा करता है और गरीबों की कोई सुनवाई नहीं होती। डेराबस्सी पुलिस की भी आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि सबूत होने के बावजूद तीन महीने बीत गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
60 वर्षीय बुजुर्ग दर्शन रानी ने बताया कि वह डीएवी पब्लिक स्कूल डेराबस्सी के पास चाय का खोखा लगाकर अपने परिवार का गुजारा करती थीं। पास में टेंपू यूनियन के लोग चाय पीने आते थे, जिससे थोड़ा-बहुत काम चल जाता था। उन्होंने कहा कि स्कूल की प्रिंसिपल कई सालों से खोखा तुड़वाने की धमकी दे रही थीं। 8 जनवरी को स्कूल का स्टाफ जबरन खोखा तोड़कर सारा सामान भी नष्ट कर गया। यह सारी हरकत प्रिंसिपल सरीता यादव के कहने पर की गई, ऐसा उनका आरोप है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले खोखे में चोरी भी हुई थी, और उन्हें शक है कि वह चोरी भी स्कूल वालों ने ही करवाई होगी। दुखी मन से बुजुर्ग महिला ने कहा कि एक महिला दूसरी महिला का रोजगार कैसे उजाड़ सकती है, जिससे उसके घर का गुजारा चलता हो। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने ऊंचे पद पर बैठी महिला किसी गरीब महिला की दुश्मन कैसे हो सकती है।
पीड़िता के अनुसार, प्रिंसिपल उन्हें यह कहकर धमकाती थीं कि उनके पति किसी बड़े पद पर तैनात हैं, इसलिए उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। स्कूल का स्टाफ भी यह धमकी देता रहता था कि स्कूल कार्यक्रमों में बड़े-बड़े अफसर मुख्य अतिथि बनकर आते हैं, इसलिए प्रिंसिपल की बहुत ऊपर तक पहुंच है और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।
बुजुर्ग महिला का कहना है कि तीन महीने बीत जाने के बाद भी, खोखा तोड़ने और तुड़वाने के मामले में सबूत होने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे यह साबित होता है कि कानून गरीबों की सुनवाई नहीं करता। पीड़िता ने पंजाब सरकार से गुहार लगाते हुए न्याय की मांग की है।
गौरतलब है कि इसी स्कूल की प्रिंसिपल सरीता यादव पर एक अन्य महिला ने भी बदसलूकी के आरोप लगाए थे। वह महिला डेराबस्सी में वर्दी की दुकान करती है और अपनी दुकान के प्रचार के लिए स्कूल के बाहर विजिटिंग कार्ड और पर्चे बांट रही थी।
यह भी बताया गया है कि स्कूल की प्रिंसिपल के खिलाफ पहले भी शिक्षा विभाग, एसडीएम डेराबस्सी और पुलिस के पास कई शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन किसी भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। एसपी डेराबस्सी बिक्रमजीत सिंह बराड़ ने कहा कि जांच अधिकारी से कार्रवाई न करने की रिपोर्ट मंगाकर मामले की जांच की जाएगी।




