ओमप्रकाश जैसे कई लोग वर्षो से खुलेआम बिजली चोरी कर ईमानदार उपभोक्ताओं पर बढ़ा रहे बोझ
चौरी चौरा / अखंड लोक। क्षेत्रीय कर्मचारियों की अनदेखी के चलते शहर और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली चोरी धड़ल्ले से हो रही है। कई उपभोक्ता शाम ढलते ही कटिया डालकर घर को रोशन करने में लगे हैं लेकिन विभागीय टीम चंद घरों में बिजली चोरी पकड़कर खानापूर्ती कर के बैठ जाती है। कुछ स्थानों पर तो मीटर से पहले ही कट लगाकर बिजली चोरी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर क्षेत्रीय कर्मचारियों को सूचना मिलने के बाद भी वह कटिया डालने वाले उपभोक्ताओं को पकड़ने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला गोरखपुर जिले के गजाईकोल विद्युत विभाग के अंतर्गत आने वाले इटौवां गांव का है जहां कटिया लगाकर बिजली विभाग को चूना लगाया जा रहा है। ओमप्रकाश राय जो कि अवैध रूप से न सिर्फ गांव के पूरानी गडही पर कब्जा किया हुआ है बल्कि अवैध अतिक्रमण की जगह पर वर्षो से कटिया द्वारा बिजली चुराकर ईमानदार उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाने का भी काम कर रहा है। ओमप्रकाश और उसके परिवार वाले बिजली चोरी की शिकायत करने वाले ग्रामिणों के साथ मारपीट तक करने को तैयार हो जाते हैं। ओमप्रकाश और उसके लड़के लोगों को विद्युत विभाग के अधिकारियों और राजनैतिक व्यक्तियों के साथ संबंध का धौस जमाते हुए कहते हैं कि हम खुलेआम बिजली चोरी करेगें हमे कोई रोक नहीं सकता। इसकी सूचना देने के लिए हमारे संवाददाता ने जब गजाईकोल के जेई से संपर्क साधने की कोशिस की तो उनका मोबाईल नंबर नहीं लग सका। अब देखना है कि विद्युत विभाग के लोग ऐसे लोगो पर क्या कार्यवाही करती है ?
ज्ञात हो कि गैर कानूनी रूप से बिजली चोरी करने वाले ईमानदार उपभोक्ताओं पर न सिर्फ बोझ बने हुए हैं बल्कि विकास में भी बड़े बाधक होते हैं। विभाग बिजली चोरों पर नकेल कसने के लिए कम कर रही है और समय – समय पर बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन पर बिजली विभाग के कुछ कर्मचारियों की वजह से बिजली चोरी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। कारण कि बिजली विभाग द्वारा रखे गये कर्मचारी पहले ही जांच की सूचना लोगों तक पहुंचा देते है जिससे बिजली चोर पहले ही सावधान हो जाते हैं और जांच कर्मियों के जाने के बाद पुनः कटिया लगाकर बिजली चोरी करने लगते हैं।
तीन साल की हो सकती है सजा- बिजली चोरी करने पर संबंधित उपभोक्ता को तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। चोरी का मामला उजागर होने पर उपभोक्ता को पहले समझौता राशि का भुगतान करने को कहा जाता है। इसमें उपभोक्ता को चोरी की गई कुल बिजली खपत की दो गुनी दर से बिल दिया जाता है। बिल न देने पर एफआइआर दर्ज कराई जाती है। वैसे विद्युत विभाग इसके लिए स्वतंत्र है कि चोरी पकड़ने पर सीधी रिपोर्ट भी दर्ज करा सकता है।
ईमानदार उपभोक्ताओं पर पड़ता है बोझ
बिजली निगम के लिए बिजली चोरी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती है। बिजली व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी विभाग की है, लेकिन इस व्यवस्था को कायम रखने के लिए लोगों की भी अहम जिम्मेदारी है। इसमें सबसे बड़ी बात बिजली चोरी की है। बिजली चोरी करने वाले लोग विकास में बड़े बाधक होते हैं।


