डेराबस्सी, अखंड लोक (देव शर्मा)
मुबारिकपुर के पास घग्गर नदी पार करने के लिए निर्मित कॉज़वे इस वक्त गंभीर संकट में घिरा है और कभी भी ढह सकता है। दो साल पूर्व आई बाढ़ में कॉज़वे के नीचे से मिट्टी बह गई थी, जिसके बाद ढकोली से आती सड़क पर बैग भरकर अस्थायी मरम्मत की गई थी। लेकिन डेराबस्सी से ढकोली जाने वाली तरफ फिर से नीचे खालीपन पैदा हो गया है, जिसकी ओर प्रशासन ने आंखें बंद कर ली हैं।

स्थानीय निवासियों ने खुलासा किया कि हाल में डी-सिल्टिंग के बहाने कॉज़वे के आसपास से भारी मात्रा में रेत खोदी गई, मगर इसे थामने की कोई कोशिश नहीं हुई। हल्के वाहनों के लिए डिज़ाइन इस कॉज़वे पर भारी ट्रकों का भी बेरोकटोक आवागमन जारी रहा, जिसने इसकी स्थिति को और दयनीय बना दिया। क्षतिग्रस्त बैरिकेड और सुरक्षा रेलिंग की मरम्मत महीनों से अधर में लटकी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता से यह मार्ग धीरे-धीरे खोखला होता चला गया, लेकिन कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ। एक कार के खाई में गिरने के बाद ही सुरक्षा रेलिंग ठीक की गई, जबकि कुछ दिनों में अस्थायी खंभे भी ढह गए। एक ओर जर्जर बैरिकेड तो सालों से वैसा ही पड़ा है। प्रशासन की इस बेरुखी से प्रतीत होता है कि अधिकारियों को जनता की जान-माल की कोई चिंता नहीं। स्कूली बसें भी इसी रास्ते से गुजरती हैं। प्रतिदिन यहां हज़ारों यात्री आते-जाते हैं। ऐसा लगता है कि सरकारी दफ़्तरों में बैठकर ए.सी. का मज़ा ले रहे बाबू इसके टूटने का इंतज़ार कर रहे है।




