गोरखपुर। नवीन परती की जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ अखबार में समाचार प्रकाशित करने पर पत्रकार प्रशांत कुमार राय पर कब्जाकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया। जिससे प्रशांत राय को सिर पर चोट आयी है।
इसी संदर्भ में पत्रकार प्रशांत राय ने गोरखपुर के झंगहा के पुलिस थाना अध्यक्ष को आवेदन देते हुए बताया कि वह अपने इटौंवा गांव स्थित घर के पास मिट्टी को एक जैसा कर रहा था। तभी ओमप्रकाश राय और उनका बड़ा लड़का सूर्य प्रताप राय मेरे पास आये और बोलने लगे कि मैने जो ताल में गाटा संख्या 155 पर कब्जा किया है उसके बारे में अखबार में क्यों लिख रहे हो। मैंने उनको बोला कि गांव में कोई भी बारात घर नहीं है। अगर बारात घर बन जायेगा तो यह गांवों वालों के लिए अच्छा होगा। इतना सुनते ही दोनों ने प्रशांत राय पर खंती और लोहे की सरिया, डंडो से जानलेवा हमला कर दिया। इतना ही नहीं ओमप्रकाश राय की पत्नी पार्वती देवी और श्रीप्रकाश (शुभम) राय और मंटू राय की पत्नी अनुपमा राय भी लोहे का सरिया और लाठी-डंडा लेकर बाहर आयी और मुझे मारने लगी। यानि सभी परिवारवालों ने एक साथ प्रशांत राय पर हमला कर दिया। शोरगुल सुनते ही प्रशांत राय के परिवार वाले बाहर आए और पत्रकार को बचाकर ले गये। इसी बीच ओमप्रकाश राय की पत्नी पार्वती देवी ने प्रशांत राय की माँ के गले से मंगलसूत्र और मंटू राय की पत्नी अनुपमा राय ने कान की एक बाली खींच ली।
बता दें कि इसके पहले भी ओमप्रकाश राय चोरी की बिजली जलाकर उपभोक्ताओं के बिजली के बिल बढाने जैसे प्रयास करने में लगा था इसके बारे में भी अखबार में प्रकाशित किया गया था साथ ही विद्युत विभाग के जेई को सूचित भी किया गया था। इन्हीं सब मुद्दो से खार खाए बैठे ओमप्रकाश एवं सूर्य प्रताप राय ने प्रशांत राय पर जानलेवा हमला कर दिया।
बता दें कि सूर्य प्रताप राय पत्रकार को जान से मारने की भी धमकी दे रहा था। साथ ही उसने प्रशांत राय को धमकी दी कि अगर तुमने अब मेरे बारे में अखबार में कुछ भी लिखा तो अच्छा नहीं होगा। सूर्य प्रताप राय ने धमकी देते हुए कहा कि मेरी पुलिस और नेताओं में अच्छी पकड़ है मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा। कहने का मतलब सीधा है कि अगर इन अतिक्रमणकारियों को गैर-कानूनी तरीके से अवैध कब्जा करने दिया जाएं तो सही है।
अतिक्रमणकारियों के खिलाफ आवाज उठाना पत्रकार को पड़ गया भारी
अतिक्रमणकारियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकार को मिला जानलेवा हमले का सबब। क्या यही प्रशासन और पुलिस की कार्यवाही है। अतिक्रमणकारियों के खिलाफ आवाज उठाना पत्रकार को भारी पड गया। सोचने वाली बात है कि जहां उत्तरप्रदेश में योगी सरकार अतिक्रमकाणियों एवं अपराधियों पर अंकुश लगाने पर मुस्तैदी से काम कर रही है वहीं कुछेक लोग अभी भी अतिक्रमणकारियोें को बढावा दे रहे है। जिसमें पुलिस एवं प्रशासन की मिली भगत है। क्योंकि अतिक्रमणकारी बिना पुलिस एवं प्रशासन की सांठगांठ के तालाब जैसे जलाशयों पर अतिक्रमण नहीं कर सकते। चौराचोरी में दबंगों ने अपनी दबंगई दिखाते हुए तालाब का पुराव कर घर या पशु के लिए झोपडा बनवा लिए है। इन लोगों की दादागिरी और दबंगई के आगे कोई भी इनके खिलाफ आवाज नहीं उठता है।
अतिक्रमणकारियों के सामने झुका पुलिस एवं प्रशासन
पुलिस एवं प्रशासन की नाक के नीचे अतिक्रमणकारी बिना किसी भय के तालाबों एवं जलाशयों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे है। और प्रशासन और पुलिस पर जूं तक नहीं रेंग रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस एवं प्रशासन का अहम रोल है। जहां योगी सरकार अतिक्रमण हटाओ अभियान पर काम कर रही है, वहीं चौरा-चौरा एरिया में पुलिस एवं प्रशासन अपनी मनमर्जी का शासन चला रहे है।
फरियादी पर ही कर दी एफआईआर दर्ज
बताईये पुलिस का काम करने का यह तरीका है कि फरियादी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी। फरियादी को घंटो पुलिस थाने में बिठाये रखा। पुलिस ना तो फरियादी को जो सिर में चोट आयी है उसका मेडिकल वेरिफिकेशन कराया और ना ही प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उसे मुहैया कराई। आखिर में बाद जब फरियादी प्रशांत कुमार राय जो कि प्रभात दर्पण के कार्यकारी कार्यकारी संपादक एवं यूटी टूडे दैनिक अखबार में पत्रकार के रूप में कार्यरत है। बाद में जब प्रशांत राय को चक्कर जैसे आने लगे तो उसने खुद प्राइवेट अस्पताल जाकर प्राथमिक चिकित्सा कराई। पुलिस का क्या फर्ज था कि जो भी फरियादी हो या आरोपी अगर किसी को चोट पहुंची है तो सबसे पहले उसको प्राथमिक चिकित्सा मुहैया करवाना चाहिए। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता के साथ जांच करनी चाहिए, पर यहां तो उल्टा है प्राथमिक मेडिकल चिकित्सा तो दूर बल्कि फरियादी को ही पकड कर थाने में बैठा दिया। इससे पत्रकार मानसिक रूप से बहुत प्रभावित हुआ।
वारदात के मुख्य आरोपी सूर्य प्रताप राय पर पुलिस की मेहरबानियां
पूरे घटनाक्रम के मुख्य आरोपी सूर्य प्रताप राय पर पुलिस की मेहरबानियां ही कहा जायेगा। क्योंकि सूर्य प्रताप राय का पूरी वारदात में अहम रोल है फिर भी वो तहसील में बेखौफ घूमता रहा। पुलिस ने उसकी तरफ नजर तक नहीं दौड़ाई। इसका सीधा मतलब है कि पुलिस की उस पर मेहरबानियां है। तभी तो फरियादी थाने में और आरोपी बाड़े में है।
योगी सरकार के आदेश यूपी के लिए, चौरी-चौरा प्रशासन और पुलिस के लिए नहीं?
योगी सरकार के आदेश केवल उत्तरप्रदेश के लिए है, चौरा-चोरी प्रशासन और पुलिस के लिए नहीं? क्योंकि यहां पर जो भी प्रशासन और पुलिस महकमे अधिकारी है उनके खुद के नियम-कानून चलते है। तभी तो फरियादी को सिर में चोट लगने के बावजूद उसे थाने में बिठाया रखा ना की उसका पहले प्राथमिक तौर पर इलाज कराना चाहिए थे। बल्कि आरोपी बिनदास बाहर घूम रहे है। जहां योगी सरकार एक स्वच्छ एवं पारदर्शिक प्रशासन बनाने में जुटी है तो वहीं कुछेक अधिकारी अभी भी अपनी ही चलाते है इसलिए तो कहते है कि आखिर बाबूजी कब लपेटे में आयेंगे। क्योंकि बाबूजी का ही शासन गांव जैसे एरिया में चलता है। यहां सरकार के नियम-कायदे नहीं चलते है।
पत्रकार ने की मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग की
अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले पत्रकारों की कभी हत्या हो जाती है तो कभी उन्हें प्रताड़ित किया जाता है ऐसे में समाज का चौथा स्तंभ आखिर कैसे निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से काम कर सकेगा। पत्रकार प्रशान्त राय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपने साथ हुए अन्याय के लिए उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें जल्द से जल्द न्याय दिलाते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करते हुए एक मिसाल कायम करें ताकि पत्रकारों पर हमले करने वालों के बिच एक सख्त संदेश जाए।
पत्रकार पर हुए हमले को दबाने के लिए जमीनी विवाद का रूप देकर पत्रकार को परेशान करने और दबाने का काम किया जा रहा है। लेकिन पत्रकार प्रशान्त राय ने बताया कि अतिक्रमणमुक्त अभियान से वे पीछे नहीं हटेंगे। अवैध कब्जाधारियों के चंगुल से छुड़ाकर गांव की जमीन गांव के हित में ही उपयोग मे ली जाएगी।




